menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ५८
chevron_left
chevron_right
शकुनिरु उवाच
स्वप्ने न तानि पश्यन्ति जाग्रतो वा युधिष्ठिर |  १९   क
कितवा यानि दीव्यन्तः प्रलपन्त्युत्कटा इव ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति