menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ५८
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु संहृष्टः पर्यपृच्छत्पुनः पुनः |  ४१   क
किं जितं किं जितमिति ह्याकारं नाभ्यरक्षत ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति