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वन पर्व
अध्याय ५८
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वृहदश्व उवाच
येषां कृते न सत्कारमकुर्वन्मय़ि नैषधाः |  १८   क
त इमे शकुना भूत्वा वासोऽप्यपहरन्ति मे ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति