वन पर्व  अध्याय ५८

दमय़न्त्यु उवाच

अवैमि चाहं नृपते न त्वं मां त्यक्तुमर्हसि |  ३१   क
चेतसा त्वपकृष्टेन मां त्यजेथा महापते ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति