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विराट पर्व
अध्याय ५८
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वैशम्पाय़न उवाच
यथा वर्षति पर्जन्ये विद्युद्विभ्राजते दिवि |  ११   क
तथा दश दिशः सर्वाः पतद्गाण्डीवमावृणोत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति