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भीष्म पर्व
अध्याय ५८
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सञ्जय़ उवाच
तस्मिन्दाशरथे युद्धे वर्तमाने भय़ावहे |  २०   क
तावकानां परेषां च प्रेक्षका रथिनोऽभवन् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति