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भीष्म पर्व
अध्याय ५८
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सञ्जय़ उवाच
तस्य नादेन महता मनोहृदय़कम्पिना |  ३५   क
व्यत्यचेष्टन्त संहत्य गजा भीमस्य नर्दतः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति