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भीष्म पर्व
अध्याय ७४
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सञ्जय़ उवाच
दुर्जय़ोऽथ विकर्णश्च कार्ष्णिं पञ्चभिराय़सैः |  २४   क
विव्यधाते न चाकम्पत्कार्ष्णिर्मेरुरिवाचलः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति