menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ५८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततो भल्लैः क्षुरप्रैश्च नाराचैर्निर्मलैरपि |  ५   क
गात्राणि प्राक्षिणोत्पार्थः शिरांसि च चकर्त ह ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति