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शल्य पर्व
अध्याय ५८
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सञ्जय़ उवाच
ये नः पुरा षण्ढतिलानवोच; न्क्रूरा राज्ञो धृतराष्ट्रस्य पुत्राः |  ११   क
ते नो हताः सगणाः सानुवन्धाः; कामं स्वर्गं नरकं वा व्रजामः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति