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द्रोण पर्व
अध्याय ३
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सञ्जय़ उवाच
अद्य गाण्डीवघोषस्य वीर्यज्ञाः सव्यसाचिनः |  १४   क
कुरवः सन्त्रसिष्यन्ति वज्रपाणेरिवासुराः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति