शान्ति पर्व  अध्याय ५९

भीष्म उवाच

तं साक्षात्पृथिवी भेजे रत्नान्यादाय़ पाण्डव |  १२१   क
सागरः सरितां भर्ता हिमवांश्चाचलोत्तमः ||  १२१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति