शान्ति पर्व  अध्याय ५९

भीष्म उवाच

यक्षराक्षसभर्ता च भगवान्नरवाहनः |  १२३   क
धर्मे चार्थे च कामे च समर्थं प्रददौ धनम् ||  १२३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति