शान्ति पर्व  अध्याय ५९

भीष्म उवाच

विप्लुते नरलोकेऽस्मिंस्ततो व्रह्म ननाश ह |  २१   क
नाशाच्च व्रह्मणो राजन्धर्मो नाशमथागमत् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति