शान्ति पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

य एष राजा-राजेति शव्दश्चरति भारत |  ५   क
कथमेष समुत्पन्नस्तन्मे व्रूहि पितामह ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति