आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५९

वासुदेव उवाच

प्राधान्यतस्तु गदतः समासेनैव मे शृणु |  ७   क
कर्माणि पृथिवीशानां यथावदमरद्युते ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति