वन पर्व  अध्याय ५९

वृहदश्व उवाच

गत्वा गत्वा नलो राजा पुनरेति सभां मुहुः |  २२   क
आकृष्यमाणः कलिना सौहृदेनापकृष्यते ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति