विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

अर्जुनोऽपि शरांश्चित्रान्भीष्माय़ निशितान्वहून् |  २६   क
चिक्षेप सुमहातेजास्तथा भीष्मश्च पाण्डवे ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति