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द्रोण पर्व
अध्याय १४२
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सञ्जय़ उवाच
मद्रराजो महाराज विराटं वाहिनीपतिम् |  २२   क
आजघ्ने त्वरितं तीक्ष्णैः शतेन नतपर्वणाम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति