विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

अतीव पाण्डवो भीष्मं भीष्मश्चातीव पाण्डवम् |  २९   क
वभूव तस्मिन्सङ्ग्रामे राजँल्लोके तदद्भुतम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति