विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

निष्पतन्तो रथात्तस्य धौता हैरण्यवाससः |  ३२   क
आकाशे समदृश्यन्त हंसानामिव पङ्क्तय़ः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति