विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

स पीडितो महावाहुर्गृहीत्वा रथकूवरम् |  ४३   क
गाङ्गेय़ो युधि दुर्धर्षस्तस्थौ दीर्घमिवातुरः ||  ४३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति