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भीष्म पर्व
अध्याय ५९
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सञ्जय़ उवाच
तं यान्तमश्वै रजतप्रकाशैः; शरान्धमन्तं धनुषा दृढेन |  २५   क
नाशक्नुवन्वारय़ितुं तदानीं; सर्वे गणा भारत ये त्वदीय़ाः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति