द्रोण पर्व  अध्याय ५९

वासुदेव उवाच

स युवा वृषभस्कन्धो दीर्घवाहुर्महावलः |  १६   क
सिंहर्षभगतिः श्रीमान्द्विषतस्ते हनिष्यति ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति