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द्रोण पर्व
अध्याय १६६
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सञ्जय़ उवाच
मदन्यो नास्ति लोकेऽस्मिन्नर्जुनाद्वास्त्रवित्तमः |  ३७   क
अहं हि ज्वलतां मध्ये मय़ूखानामिवांशुमान् |  ३७   ख
प्रय़ोक्ता देवसृष्टानामस्त्राणां पृतनागतः ||  ३७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति