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शल्य पर्व
अध्याय ५९
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सञ्जय़ उवाच
सेय़ं रत्नसमाकीर्णा मही सवनपर्वता |  ४२   क
उपावृत्ता महाराज त्वामद्य निहतद्विषम् ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति