आदि पर्व  अध्याय ६

सूत उवाच

तां ददर्श स्वय़ं व्रह्मा सर्वलोकपितामहः |  ५   क
रुदतीं वाष्पपूर्णाक्षीं भृगोर्भार्यामनिन्दिताम् |  ५   ख
सान्त्वय़ामास भगवान्वधूं व्रह्मा पितामहः ||  ५   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति