सौप्तिक पर्व  अध्याय ६

सञ्जय़ उवाच

कृतवर्माणमामन्त्र्य कृपं च स महारथम् |  २   क
द्रौणिर्मन्युपरीतात्मा शिविरद्वारमासदत् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति