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सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
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सञ्जय़ उवाच
ध्रुवं येय़मधर्मे मे प्रवृत्ता कलुषा मतिः |  ३०   क
तस्याः फलमिदं घोरं प्रतिघाताय़ दृश्यते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति