अनुशासन पर्व  अध्याय ६

भीष्म उवाच

न तथा मानुषे लोके भय़मस्ति शुभाशुभे |  २१   क
यथा त्रिदशलोके हि भय़मल्पेन जाय़ते ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति