अनुशासन पर्व  अध्याय ६

भीष्म उवाच

आत्मैव ह्यात्मनो वन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः |  २७   क
आत्मैव चात्मनः साक्षी कृतस्याप्यकृतस्य च ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति