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अनुशासन पर्व
अध्याय ६
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भीष्म उवाच
यादृशं वपते वीजं क्षेत्रमासाद्य कर्षकः |  ६   क
सुकृते दुष्कृते वापि तादृशं लभते फलम् ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति