आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ६

व्यास उवाच

श्रोतव्यं चेन्मय़ा राजन्व्रूहि मे पार्थिवर्षभ |  १३   क
व्यपनेष्यामि ते मन्युं सर्वय़त्नैर्नराधिप ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति