वन पर्व  अध्याय ६

वैशम्पाय़न उवाच

पाण्डवास्तु वने वासमुद्दिश्य भरतर्षभाः |  १   क
प्रय़युर्जाह्नवीकूलात्कुरुक्षेत्रं सहानुगाः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति