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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
भगवन्संहृतं सर्वं त्वय़ा भूय़िष्ठमच्युत |  ४६   क
रामस्य पदमन्विच्छ तत्र गच्छाम यत्र सः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति