कर्ण पर्व  अध्याय ३

वैशम्पाय़न उवाच

यत्त्वय़ा कथितं वाक्यं श्रुतं सञ्जय़ तन्मय़ा |  १२   क
कच्चिद्दुर्योधनः सूत न गतो वै यमक्षय़म् |  १२   ख
व्रूहि सञ्जय़ तत्त्वेन पुनरुक्तां कथामिमाम् ||  १२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति