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शल्य पर्व
अध्याय ६
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शल्य उवाच
पाञ्चालाश्चेदय़श्चैव द्रौपदेय़ाश्च सर्वशः |  १३   क
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सर्वे चापि प्रभद्रकाः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति