शल्य पर्व  अध्याय ६

सञ्जय़ उवाच

प्रहर्षं प्राप्य सेना तु तावकी भरतर्षभ |  २०   क
तां रात्रिं सुखिनी सुप्ता स्वस्थचित्तेव साभवत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति