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शल्य पर्व
अध्याय ६
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सञ्जय़ उवाच
केशवे तु तदा याते धर्मराजो युधिष्ठिरः |  ३९   क
विसृज्य सर्वान्भ्रातॄंश्च पाञ्चालानथ सोमकान् |  ३९   ख
सुष्वाप रजनीं तां तु विशल्य इव कुञ्जरः ||  ३९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति