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आदि पर्व
अध्याय ६०
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वैशम्पाय़न उवाच
कामस्य तु रतिर्भार्या शमस्य प्राप्तिरङ्गना |  ३२   क
नन्दी तु भार्या हर्षस्य यत्र लोकाः प्रतिष्ठिताः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति