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आदि पर्व
अध्याय ६०
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वैशम्पाय़न उवाच
तथा दुहितरौ राजन्सुरभिर्वै व्यजाय़त |  ६५   क
रोहिणीं चैव भद्रं ते गन्धर्वीं च यशस्विनीम् |  ६५   ख
रोहिण्यां जज्ञिरे गावो गन्धर्व्यां वाजिनः सुताः ||  ६५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति