शान्ति पर्व  अध्याय ६०

वैशम्पाय़न उवाच

केन स्विद्वर्धते राष्ट्रं राजा केन विवर्धते |  ३   क
केन पौराश्च भृत्याश्च वर्धन्ते भरतर्षभ ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति