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वन पर्व
अध्याय १७
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वासुदेव उवाच
गृहीत्वा तु धनुः साम्वः शाल्वस्य सचिवं रणे |  ११   क
योधय़ामास संहृष्टः क्षेमवृद्धिं चमूपतिम् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति