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शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
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व्यास उवाच
नैवास्य विन्दन्ति गतिं महात्मनो; न चागतिं कश्चिदिहानुपस्यति |  ८९   क
ज्ञानात्मकाः संय़मिनो महर्षय़ः; पश्यन्ति नित्यं पुरुषं गुणाधिकम् ||  ८९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति