उद्योग पर्व  अध्याय १८७

भीष्म उवाच

निराहारा कृशा रूक्षा जटिला मलपङ्किनी |  १९   क
षण्मासान्वाय़ुभक्षा च स्थाणुभूता तपोधना ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति