आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ६०

वैशम्पाय़न उवाच

समाहूते तु सङ्ग्रामे पार्थे संशप्तकैस्तदा |  १९   क
पर्यवार्यत सङ्क्रुद्धैः स द्रोणादिभिराहवे ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति