आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ६०

वैशम्पाय़न उवाच

वैराटि नेह सन्तापस्त्वय़ा कार्यो यशस्विनि |  ३९   क
भर्तारं प्रति सुश्रोणि गर्भस्थं रक्ष मे शिशुम् ||  ३९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति