सभा पर्व  अध्याय ६०

दुर्योधन उवाच

ततो जवेनाभिससार रोषा; द्दुःशासनस्तामभिगर्जमानः |  २२   क
दीर्घेषु नीलेष्वथ चोर्मिमत्सु; जग्राह केशेषु नरेन्द्रपत्नीम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति