वन पर्व  अध्याय ६०

वृहदश्व उवाच

नृशंसं वत राजेन्द्र यन्मामेवङ्गतामिह |  ९   क
विलपन्तीं समालिङ्ग्य नाश्वासय़सि पार्थिव ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति