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विराट पर्व
अध्याय ६०
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो गजे राजनि चैव भिन्ने; भग्ने विकर्णे च सपादरक्षे |  १३   क
गाण्डीवमुक्तैर्विशिखैः प्रणुन्ना; स्ते योधमुख्याः सहसापजग्मुः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति